यहाँ तुम्हारे लिए एक छोटी सी self poem हिंदी में ✨

 

*मैं*  

मैं सुबह की पहली किरण सा हूँ,  

जो अँधेरे को चीर के निकलती है।  

मैं ठोकरों से बना रास्ता हूँ,  

जो गिरकर भी फिर से संभलती है।  

 

मैं सवाल भी हूँ, जवाब भी हूँ,  

कभी खामोश सा किताब भी हूँ।  

भीड़ में हूँ तो भी अकेला हूँ,  

और अकेला हूँ तो पूरा मेला हूँ।  

 

हार को मैंने सबक कहा,  

जीत को बस एक पड़ाव कहा।  

मैं कल से बेहतर आज हूँ,  

मैं अपनी ही तलाश में नाराज़ हूँ।  

 

मैं अधूरा हूँ, फिर भी पूरा हूँ,  

टूटकर खुद को जोड़ता चूरा हूँ।  

नाम मेरा कोई भी रख लो तुम,  

मैं बस "मैं" हूँ, और ये ही मेरा सुरूर हूँ।